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काशी — जो इतिहास से भी पुरानी हैKashi — older than history itself

अंधेरे में एक दीया जलता है। घाट जागते हैं। गंगा बहती रहती है — जैसे सदियों से बहती आई है।

यात्रा आरंभ करें

काशी में एक दिनA day in Kashi

शहर दिन में तीन बार जन्म लेता है: भोर में नदी पर, दोपहर गलियों में, शाम आरती में।

05:40अस्सी घाट

सुबह-ए-बनारस

सूरज उस पार से उठता है। शंख बजता है, नावें खुलती हैं, और घाट की सीढ़ियाँ धीरे-धीरे भर जाती हैं।

12:30पुरानी गलियाँ

गलियों की दोपहर

कचौड़ी की गंध, पीतल की चमक, बनारसी साड़ी के तागे — और हर मोड़ पर एक छोटा-सा मंदिर।

18:40दशाश्वमेध घाट

गंगा आरती

सात दीपमालाएँ एक साथ उठती हैं। घंटियाँ, शंख, धुआँ — और पूरा घाट एक लौ की तरह जल उठता है।

काशी के स्थानPlaces of Kashi

घाट, मंदिर, स्तूप, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च: छाँटिए, नक्शे पर देखिए, छूकर पढ़िए।

35 स्थान

नक़्शा लोड हो रहा है…

एक काशी, हर आस्थाOne Kashi, every faith

सात परंपराएँ, हर एक की अपनी सुबह, सबकी एक गंगा।

काशी में आगमन के क्रम में

हिन्दू

शिव की नगरी, जहाँ मृत्यु भी मुक्ति है।

वाणी

काश्यां मरणान्मुक्तिः

Kāśyāṃ maraṇān muktiḥ

काशी में मरण ही मुक्ति है।

Traditional, Kāśī Khaṇḍa
  • काशी विश्वनाथ मंदिर
  • दशाश्वमेध घाट
  • काल भैरव मंदिर
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जैन

तेईसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ की जन्मभूमि।

वाणी

परस्परोपग्रहो जीवानाम्

Parasparopagraho jīvānām

जीव परस्पर एक-दूसरे का उपकार करते हैं।

Tattvārtha Sūtra 5.21
  • भेलूपुर जैन मंदिर (पार्श्वनाथ जन्मस्थली)
  • सारनाथ — धमेख स्तूप
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बौद्ध

सारनाथ — जहाँ बुद्ध ने पहला उपदेश दिया।

वाणी

सब्बे सत्ता सुखिता होन्तु

Sabbe sattā sukhitā hontu

सभी प्राणी सुखी हों।

Pāli, Mettā chant
  • सारनाथ — धमेख स्तूप
  • मूलगंध कुटी विहार
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इस्लाम

बुनकरों की गलियाँ, गंगा-जमुनी तहज़ीब, और नदी के ऊपर मीनारें।

वाणी

بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Bismillāhir-raḥmānir-raḥīm

अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयालु और कृपाशील है।

Qur'ān, opening of every sūrah
  • आलमगीर मस्जिद (बेनी माधव का धरहरा)
  • पंचगंगा घाट
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भक्ति संत

कबीर, रविदास, तुलसी — जिनकी वाणी मंदिर-मस्जिद से बड़ी हुई।

वाणी

मोको कहाँ ढूँढ़े रे बंदे, मैं तो तेरे पास में

Moko kahān ḍhūnḍhe re bande, main to tere pās men

मुझे कहाँ ढूँढ़ते हो बंदे, मैं तो तेरे पास हूँ।

Kabīr
  • कबीर चौरा मठ
  • श्री गुरु रविदास जन्मस्थान, सीर गोवर्धनपुर
  • तुलसी मानस मंदिर
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सिख

गुरु नानक और गुरु तेग़ बहादुर की संगत, नीचीबाग़ में।

वाणी

ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ

Ik Oaṅkār Sati Nāmu

एक ओंकार, जिसका नाम सत्य है।

Mūl Mantar, Gurū Granth Sāhib
  • गुरुद्वारा गुरु का बाग़
  • गुरुद्वारा बड़ी संगत (नीचीबाग़)
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ईसाई

छावनी का दो सौ साल पुराना चर्च और शहर के स्कूल-अस्पताल।

वाणी

Ἐγώ εἰμι τὸ φῶς τοῦ κόσμου

Egō eimi to phōs tou kosmou

मैं जगत की ज्योति हूँ।

John 8:12
  • सेंट मैरी चर्च, छावनी
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नई काशीProjects & the new Kashi

पुराने शहर के बगल में क्या बन रहा है, हर स्थिति स्रोत से जाँची हुई।

स्थिति:निर्माणाधीनघोषितपूर्ण· अंतिम सत्यापन: 7 अक्टूबर 2026

निर्माणाधीन

घोषित

पूर्ण

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उत्सवों का वर्षA year of festivals

यहाँ का कैलेंडर चाँद से चलता है; हर महीने कहीं न कहीं एक ज्योति जलती है।

  1. जनपार्श्वनाथ जन्म कल्याणक, गुरु रविदास जयंती
  2. फ़रगुरु रविदास जयंती, महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी व मसान होली
  3. मार्चईद-उल-फ़ित्र, महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी व मसान होली
  4. अप्रैलबुद्ध पूर्णिमा
  5. मईबुद्ध पूर्णिमा, गंगा दशहरा
  6. जूनमुहर्रम, गंगा दशहरा, कबीर जयंती
  7. जुलमुहर्रम, श्रावण (सावन) — काशी विश्वनाथ
  8. अगश्रावण (सावन) — काशी विश्वनाथ
  9. सितरामनगर की रामलीला
  10. अक्टूरामनगर की रामलीला, नाग नथैया, छठ पूजा, भरत मिलाप
  11. नवगंगा महोत्सव, नाग नथैया, छठ पूजा, देव दीपावली, गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व)
  12. दिसकाशी तमिल संगमम, क्रिसमस, पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक

तिथियाँ चंद्र पंचांग के अनुसार हर साल बदलती हैं; यात्रा से पहले जाँच लें।

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बनारसी स्वादThe taste of Banaras

खड़े-खड़े, कुल्हड़ या पत्तल में, भोर से आधी रात तक।

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अपनी यात्रा की योजना बनाएँ

व्यावहारिक गाइड, उद्धृत स्रोतों से जाँचे हुए।

काशी यात्रा गाइड

यात्रा-योजनाItineraries

एक, दो या तीन दिन: सूर्योदय से पहले से शाम की आरती तक।

सूर्योदय पर नदी, मंदिर, गलियाँ, और रात में दीये।

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दिन 1नदी, मंदिर, गलियाँ

  1. 05:30सूर्योदय

    अस्सी घाट

    सुबह की आरती, राग और योग, जब सूरज उस पार से उगता है।

  2. 06:30

    अस्सी से दशाश्वमेध तक नाव

    एक घंटे पानी पर, मणिकर्णिका सहित अधिकांश प्रमुख घाटों के पास से।

  3. 08:00

    काशी विश्वनाथ मंदिर

    ललिता घाट से कॉरिडोर होकर प्रवेश करें।

  4. 09:30

    कचौड़ी-सब्ज़ी का नाश्ता

    कचौड़ी गली मंदिर से थोड़ी पैदल दूरी पर है।

  5. 11:00

    गलियों की सैर

    विश्वनाथ गली, ठठेरी बाज़ार और चौक की ओर पीतल और रेशम की गलियाँ।

  6. 16:30

    घाटों पर विश्राम

    सीढ़ियों पर चाय, जब रोशनी नरम पड़ती है।

  7. 18:00सूर्यास्त

    दशाश्वमेध घाट

    सीढ़ियों या नाव पर जगह के लिए जल्दी पहुँचें।

स्थान के नाम पर जाकर विवरण देखें

जानकारीPractical

कैसे पहुँचें, कब आएँ, और घाटों व मंदिरों में कैसे रहें।

हवाई

लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (बाबतपुर) शहर से 25 किमी उत्तर-पश्चिम में है — दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, हैदराबाद से सीधी उड़ानें; टैक्सी/प्रीपेड कैब से घाटों तक लगभग एक घंटा।

रेल

वाराणसी जंक्शन (कैंट) मुख्य स्टेशन है; बनारस (मंडुआडीह) और काशी स्टेशन भी हैं। दिल्ली से वंदे भारत लगभग 8 घंटे में; कैंट से गोदौलिया ऑटो से 20–30 मिनट।

सड़क

NH-19 (दिल्ली–कोलकाता) और NH-31 पर; लखनऊ 300 किमी, प्रयागराज 120 किमी। पुराने शहर की गलियों में गाड़ी नहीं जा सकती — गोदौलिया के बाद पैदल या रिक्शा।

उत्तम मौसम

अक्टूबर से मार्च — ठंडी सुबहें, साफ़ आसमान, देव दीपावली और शिवरात्रि। अप्रैल–जून में 40°C से ऊपर; जुलाई–सितंबर में गंगा चढ़ती है और कई घाट डूब जाते हैं, नाव-सेवाएँ रुक सकती हैं।

शिष्टाचार

  • मंदिरों में जूते, चमड़ा और फ़ोन बाहर रखें; कंधे-घुटने ढके रहें।
  • मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर दाह-संस्कार की तस्वीरें न लें, दूर से और चुपचाप देखें।
  • आरती के समय पुजारियों के मंच के सामने न खड़े हों; सीढ़ियों या नाव से देखें।
  • नाव और गाइड का दाम पहले तय करें; 'विशेष दर्शन' के दलालों से बचें।
  • गंगा में प्लास्टिक न बहाएँ; दीये मिट्टी के ही लें।
  • गुरुद्वारे में सिर ढकें, मस्जिद में नमाज़ के समय बाहर रहें, चर्च में सेवा के दौरान शांत रहें।

गंगा आरतीThe Ganga Aarti

हर शाम, जब सूरज शहर के पीछे ढलता है, दशाश्वमेध पर दीपमालाएँ उठती हैं। जो यात्रा एक दीये से शुरू हुई थी, वह यहाँ हज़ार दीयों के साथ पूरी होती है।

ॐ नमः शिवाय · हर हर गंगे

काशी आइए। दीये जल चुके हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बनारस किस चीज़ के लिए प्रसिद्ध है?

गंगा के 84 घाट और शाम की गंगा आरती, काशी विश्वनाथ मंदिर (बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक), मणिकर्णिका जहाँ दाह-संस्कार कभी नहीं रुकते, सारनाथ जहाँ बुद्ध ने पहला उपदेश दिया, बनारसी रेशमी साड़ी, और कचौड़ी-सब्ज़ी से मलइयो और पान तक का खाना। यह दुनिया के सबसे पुराने लगातार बसे शहरों में से एक है।

क्या काशी, बनारस और वाराणसी एक ही शहर हैं?

हाँ। काशी प्राचीन नाम है, बनारस आम बोलचाल का, और वाराणसी आधिकारिक नाम, जो पुराने शहर को घेरने वाली वरुणा और अस्सी नदियों से बना है।

वाराणसी में कितने दिन चाहिए?

अधिकतर लोगों के लिए दो दिन काफ़ी हैं: भोर और शाम में नदी, काशी विश्वनाथ और गलियाँ, और आधे दिन में सारनाथ। बाकी आस्थाओं के स्थलों के लिए तीसरा दिन जोड़ें।

वाराणसी घूमने का सबसे अच्छा समय कब है?

अक्टूबर से मार्च, जब दिन सुहाने होते हैं और नदी के बड़े त्योहार पड़ते हैं, जिनमें 24 नवंबर 2026 की देव दीपावली भी है। अप्रैल से जून बहुत गर्म होता है, और जुलाई से सितंबर गंगा घाटों पर चढ़ आती है और नावें बंद रहती हैं।

गंगा आरती कितने बजे होती है?

रोज़ सूर्यास्त पर दशाश्वमेध घाट पर: नवंबर से फ़रवरी लगभग शाम 6 बजे और गर्मियों में लगभग 7 बजे, करीब 45 मिनट। यह निःशुल्क है। सुबह की आरती अस्सी घाट पर सूर्योदय से पहले होती है।

स्रोत: UNESCO — Ancient Buddhist Site of Sarnath inscribed on the World Heritage List · Wikipedia — Varanasi · Wikipedia — Ghats in Varanasi