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सुबह की रोशनी में वाराणसी में गंगा पर लकड़ी की नाव खेता नाविक, पीछे नदी पर और नावें
काशी यात्रा गाइड

बनारस में नाव की सवारी: किराया, समय, रास्ता और कहां से बैठेंBoat ride in Varanasi: price per person, timings, routes and ghats

Kashidwar द्वारा ·

  • सरकारी किराया₹345 प्रति व्यक्ति, अस्सी–नमो आना-जाना
  • साझा सीटसुबह ₹80–150 · आरती ₹200–300 (लगभग)
  • निजी नावचप्पू नाव ~₹400/घंटा · मोटरबोट ₹3,500–4,500
  • कहाँ से बैठेंअस्सी (सुबह) · दशाश्वमेध (आरती) · नमो
  • रात की सीमारात 8:30 के बाद नाव नहीं
  • अभीकेवल मोटरबोट, सुबह 6–शाम 5 (9 अक्टूबर 2026 का आदेश)

गंगा में नाव से बनारस के 84 घाट सबसे साफ दिखते हैं, दक्षिण में अस्सी से उत्तर में राजघाट और नमो घाट तक। इस गाइड में प्रति व्यक्ति सरकारी किराया, सूर्योदय और शाम की आरती के समय घाट पर चल रहे भाव, नाव कहां से लें, और समय, लाइफ जैकेट व मानसून के नियम दिए गए हैं। 12 अक्टूबर 2026 की स्थिति में केवल मोटर बोट 06:00 से 17:00 के बीच चल रही हैं।

वाराणसी में नाव का किराया: सरकारी दरें और घाट पर असली भाव

वाराणसी नगर निगम ने नाविक संगठनों से बातचीत के बाद जून 2023 में प्रति व्यक्ति नाव किराया तय किया और जनवरी 2025 में मुख्य दर दोहराई: अस्सी से नमो घाट तक आने-जाने का ₹345 प्रति व्यक्ति। रेट बोर्ड प्रमुख घाटों पर लगने हैं; शिकायत काशी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की हेल्पलाइन 1533 पर करें।

  • सरकारी, अस्सी–नमो घाट आना-जाना: ₹345 प्रति व्यक्ति
  • सरकारी, हरिश्चंद्र–मणिकर्णिका आना-जाना: ₹125 प्रति व्यक्ति
  • सरकारी, गंगा द्वार (ललिता घाट) से अस्सी या नमो, आना-जाना: ₹175 प्रति व्यक्ति
  • सरकारी, आरती दर्शन के लिए मोटर बोट, 2 घंटे: ₹175 प्रति व्यक्ति
  • साझा नाव में सीट: सुबह लगभग ₹80–150, आरती के समय ₹200–300 (अनुमानित)
  • निजी चप्पू वाली नाव: लगभग ₹400 प्रति घंटा; एजेंसी से 4 लोगों तक 1.5 घंटे के ₹1,800 (अनुमानित)
  • निजी मोटर बोट, 10 लोगों तक: सुबह लगभग ₹3,500, शाम ₹4,500 (अनुमानित)
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व्यवहार में ज्यादातर किराया घाट पर मोलभाव से तय होता है। नीचे ट्रैवल साइटों की दरें अनुमानित हैं। त्योहारों की रात भाव बढ़ जाते हैं: नए साल की पूर्व संध्या 2024 पर अमर उजाला ने ₹200 की सवारी के ₹1,000 वसूले जाते पाए, और घाटों पर रेट बोर्ड नहीं थे।

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सूर्योदय की नाव सवारी

सूर्योदय की सवारी बनारस की सबसे जानी-मानी नाव यात्रा है। नदी शांत रहती है, सूरज सामने के किनारे से उगकर घाटों को रोशन करता है, और सीढ़ियों पर स्नान और पूजा करते लोग दिखते हैं। साझा नाव की सीट शाम के लगभग आधे दाम में मिलती है।

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ज्यादातर सवारी अस्सी घाट से उत्तर में मणिकर्णिका तक जाकर लगभग 1.5 घंटे में लौटती है। पहुंचने का समय एक शाम पहले तय कर लें। अस्सी पर भोर से पहले निःशुल्क सुबह-ए-बनारस कार्यक्रम में वेदपाठ, आरती और संगीत होता है।

मौजूदा स्थिति: 9 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार केवल बड़ी मोटर बोट 06:00 से 17:00 तक, निर्धारित क्षमता के आधे यात्रियों के साथ चल सकती हैं। चप्पू वाली नावों पर रोक जारी है, इसलिए अभी सूर्योदय की सवारी का मतलब 06:00 या उसके बाद चलने वाली मोटर बोट है।

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गंगा आरती की नाव सवारी

शाम को नावें दशाश्वमेध और राजेंद्र प्रसाद घाट के सामने इकट्ठा होकर आरती मंच की ओर मुंह करके रुकती हैं। 2026 की एक गाइड के अनुसार आरती सर्दियों में लगभग 17:45 और गर्मियों में 18:45 बजे शुरू होती है। साझा नाव में सीट लगभग ₹200–300 प्रति व्यक्ति और एजेंसी से निजी चप्पू वाली नाव 4 लोगों तक लगभग ₹2,500 (अनुमानित) है; 2023 की सरकारी सूची में मोटर बोट पर दो घंटे का किराया ₹175 प्रति व्यक्ति है।

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आगे की जगह के लिए 45 से 60 मिनट पहले बैठें, और पक्का कर लें कि नाव आरती खत्म होने तक रुकेगी। सभी नावों को 20:30 तक नदी से हट जाना होता है।

मौजूदा स्थिति: 9 अक्टूबर 2026 के आदेश में मोटर बोट केवल 17:00 तक चल सकती हैं और चप्पू वाली नावों पर रोक है, इसलिए नया आदेश आने तक शाम की आरती वाली नावें नहीं चल रहीं। घाट की सीढ़ियों से आरती निःशुल्क देखें।

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रास्ता और रास्ते में क्या दिखता है

बनारस के 84 घाट गंगा के पश्चिमी किनारे पर दक्षिण में अस्सी से उत्तर में राजघाट के आगे आदि केशव तक फैले हैं। चप्पू वाली नाव की सामान्य सवारी अस्सी से मणिकर्णिका आना-जाना है, लगभग 1.5 घंटे। मोटर बोट आगे पंचगंगा, राजघाट और नमो घाट तक जाती हैं।

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अस्सी से उत्तर की ओर तुलसी घाट, किले की दीवारों वाला चेत सिंह घाट, दक्षिण का श्मशान घाट हरिश्चंद्र, केदार, दशाश्वमेध, राजेंद्र प्रसाद, मान मंदिर और श्री काशी विश्वनाथ धाम का गंगा द्वार ललिता घाट आते हैं। फिर मणिकर्णिका, झुके रत्नेश्वर महादेव मंदिर वाला सिंधिया घाट और पंचगंगा घाट आते हैं।

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नाव कहां से लें

जिस तरह की सवारी चाहिए, उसके हिसाब से घाट चुनें। किराया पूरे तट पर लगभग एक जैसा है; फर्क भीड़ और यात्रा की दिशा का है।

  • अस्सी घाट: दक्षिणी छोर; सूर्योदय सवारी का सामान्य शुरुआती घाट, बीच के घाटों से शांत।
  • दशाश्वमेध और राजेंद्र प्रसाद घाट: बीच का हिस्सा, गोदौलिया से कुछ ही दूरी पर; आरती वाली नावों का मुख्य स्थान, और दलालों की सबसे ज्यादा भीड़ यहीं।
  • नमो घाट: उत्तरी छोर, सड़क से पहुंचना आसान, जेटी और पहला तैरता सीएनजी स्टेशन। यहां से आरती की नाव प्रकार के अनुसार ₹500–5,000 बताई गई है (अनुमानित)।
  • राजघाट: नमो घाट के पास, मालवीय पुल के निकट।
  • रविदास घाट: अस्सी के दक्षिण में लंका के पास; अलकनंदा क्रूज की बोर्डिंग और दूसरा तैरता सीएनजी स्टेशन।

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नियम: रात 20:30 की सीमा, मानसून में रोक और लाइफ जैकेट

रात की सीमा। मई 2024 से वाराणसी जल पुलिस ने नाविकों की सहमति से रात 20:30 के बाद नाव चलाने पर रोक लगाई है। इसके बाद मिली नाव जब्त हो सकती है, लाइसेंस रद्द हो सकता है और एफआईआर दर्ज हो सकती है। इस सीमा को हटाने का कोई आदेश हमें नहीं मिला।

  • रात 20:30 के बाद नाव नहीं (जल पुलिस, मई 2024)
  • 9 अक्टूबर 2026 से: केवल मोटर बोट, 06:00–17:00, आधी क्षमता
  • नाव चलने से पहले लाइफ जैकेट पहनें; ज्यादा भरी नाव में न बैठें
  • आपातकाल 112; हेल्पलाइन 1533
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मानसून। लगभग जुलाई से सितंबर तक गंगा निचली सीढ़ियों के ऊपर चढ़ आती है; राजघाट गेज पर चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे का स्तर 71.262 मीटर है। 2026 में 30 जुलाई को तेज हवा के कारण सभी नावें रोकी गईं, 14 अगस्त को फिर चलीं और 16 व 22 अगस्त को दोबारा रोक दी गईं; 3 सितंबर को नदी चेतावनी स्तर से ऊपर थी। 9 अक्टूबर को एसीपी दशाश्वमेध ने बड़ी मोटर बोट को 06:00 से 17:00 तक, आधी क्षमता और दो प्रशिक्षित तैराकों के साथ चलाने की अनुमति दी। चप्पू वाली नावों पर अगले आदेश तक रोक है।

लाइफ जैकेट। हर यात्री के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य है, और नाव में उतने ही लोग बैठ सकते हैं जितनी उसकी लाइसेंसी क्षमता और लाइफ जैकेट हों। मई 2026 में पुलिस ने बताया कि सुरक्षा नियम तोड़ने पर 60 से अधिक नावें जब्त हुईं; जून में प्रशासन ने पंजीकृत नावों को स्वीकृत क्षमता के अनुसार जैकेट देना शुरू किया, और अब नावों को रेडी टू मूव प्रमाणपत्र भी चाहिए।

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देव दीपावली की नावें और गंगा क्रूज

आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं — यात्रा से पहले जाँच लें

2026 में देव दीपावली 24 नवंबर को है। अमर उजाला ने 10 अक्टूबर को बताया कि उस रात के बड़े क्रूज पहले ही बिक चुके थे: 60 सीटों वाला अलकनंदा एक विदेशी समूह ने ₹5 लाख में लिया, और 100 सीटों वाले सैम मानेकशॉ की सीटें ₹15,000 प्रति यात्री बिकीं। बड़ी पारंपरिक नाव बजड़ा का भाव ₹15,000 से ₹2 लाख, साझा नाव टूर ₹5,000 प्रति व्यक्ति और पूरी नाव ₹1 लाख तक बताया गया। इस रात के लिए कोई सरकारी किराया नहीं है।

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होटल या पंजीकृत नाविक के जरिए हफ्तों पहले बुक करें, और नाव का प्रकार, बोर्डिंग घाट, समय और रास्ता लिखित में लें। उस रात क्रूज का बताया गया समय 17:30 से 21:30 है, जो सामान्य 20:30 की सीमा से आगे है, इसलिए पूछ लें कि क्या अनुमति है।

सामान्य दिनों में नॉर्डिक क्रूज लाइन का अलकनंदा रविदास घाट से 09:00 और 17:30 बजे लगभग 1.5 घंटे की सैर के लिए ₹1,000 प्रति व्यक्ति से सूचीबद्ध है। यह फरवरी 2025 की सूची से है और इस मौसम के लिए पुष्ट नहीं; संचालक से पुष्टि कर लें।

स्रोत: [19] · [20] · [8] · [9]

श्मशान घाट, शिष्टाचार और दलाल

मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र श्मशान घाट हैं, जहां दिन-रात दाह संस्कार होते हैं। नाव से इन्हें सम्मानजनक दूरी से देखा जाता है। चिताओं या शोक मना रहे लोगों की फोटो या वीडियो न लें; इससे परिवारों को ठेस पहुंचती है और विवाद होता है। आवाज धीमी रखें और गुजरते समय कुछ खाएं या धूम्रपान न करें। लकड़ी के लिए दान मांगने वाले स्वयंभू गाइड होते हैं; दान अनिवार्य नहीं है।

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दशाश्वमेध और उसकी गलियों में दलाल सक्रिय रहते हैं। पानी के किनारे नाविक से सीधे बात करें और किराया, प्रति व्यक्ति या पूरी नाव, समय, रास्ता और शाम को नाव आरती तक रुकेगी या नहीं, पहले तय करें। लाइफ जैकेट देख लें, भुगतान अंत में करें, और ज्यादा वसूली हो तो 1533 पर फोन करें।

स्रोत: [22] · [4] · [3]

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी में नाव की सवारी का किराया प्रति व्यक्ति कितना है?

नगर निगम का तय किराया अस्सी से नमो घाट तक आने-जाने का ₹345 प्रति व्यक्ति है। घाट पर साझा नाव की सीट सुबह लगभग ₹80–150 और शाम की आरती के समय ₹200–300, और निजी चप्पू वाली नाव लगभग ₹400 प्रति घंटा (अनुमानित) है। बैठने से पहले किराया तय कर लें।

बनारस में नाव की सवारी का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

अक्टूबर से मार्च के बीच सूर्योदय का समय। नदी शांत रहती है, घाटों पर सुबह की पूजा चलती है, और किराया शाम से कम होता है। जुलाई से सितंबर में ऊंचे जलस्तर के कारण नावें अक्सर बंद रहती हैं।

क्या गंगा आरती नाव से देखी जा सकती है?

आम तौर पर हां: आरती से पहले नावें दशाश्वमेध के सामने रुकती हैं। 12 अक्टूबर 2026 की स्थिति में मोटर बोट केवल 17:00 तक चल सकती हैं और चप्पू वाली नावों पर रोक है, इसलिए नया आदेश आने तक शाम की आरती वाली नावें नहीं चल रहीं।

मोटर बोट लें या चप्पू वाली नाव?

चप्पू वाली नाव शांत और धीमी है, और अस्सी से मणिकर्णिका आने-जाने में लगभग 1.5 घंटे लेती है। मोटर बोट पूरे अस्सी–नमो तट को कवर करती है और लगभग 10 लोगों तक के समूह के लिए ठीक है। वाराणसी की ज्यादातर मोटर बोट अब सीएनजी से चलती हैं।

क्या अंधेरा होने के बाद नाव चलती है?

केवल 20:30 तक। मई 2024 से जल पुलिस ने 20:30 के बाद नाव चलाने पर रोक लगाई है; इसके बाद नदी में मिली नाव जब्त हो सकती है और उसका लाइसेंस रद्द हो सकता है।

क्या मानसून में नावें चलती हैं?

अक्सर नहीं। गंगा का जलस्तर बढ़ने या तेज हवा चलने पर प्रशासन सभी नावें बंद कर देता है, जैसा 2026 में जुलाई के अंत से सितंबर के बीच कई बार हुआ। नए आदेश के बाद सवारी चरणों में फिर शुरू होती है।

देव दीपावली के लिए नाव कैसे बुक करें?

होटल या पंजीकृत नाविक के जरिए हफ्तों पहले बुक करें। 24 नवंबर 2026 के लिए बड़े क्रूज 10 अक्टूबर तक बिक चुके थे, बजड़े का भाव ₹15,000 से ₹2 लाख और साझा नाव टूर लगभग ₹5,000 प्रति व्यक्ति बताया गया।

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