भक्तिमठ
कबीर चौरा मठKabir Chaura Math
कबीर पंथ की पीठ, उस मोहल्ले में जहाँ 15वीं सदी में जुलाहा-कवि कबीर रहते और गाते थे। मठ में उनका करघा, खड़ाऊँ और समाधि मंदिर हैं, और आज भी उनके वे दोहे छपते हैं जो किसी एक धर्म के नहीं।
'मोको कहाँ ढूँढ़े रे बंदे, मैं तो तेरे पास में' — कबीर ने मंदिर और मस्जिद दोनों पर व्यंग्य किया और दोनों उन्हें अपना कहते हैं।
सुझाव
- करघा और पांडुलिपि कक्ष देखने का आग्रह करें।
- लहरतारा, जहाँ कबीर तालाब किनारे शिशु रूप में मिले, 5 किमी पश्चिम में अलग स्थल है।
कैसे पहुँचें
- वाराणसी जंक्शन (कैंट) स्टेशन से सीधी रेखा में 2 किमी
- लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा से सीधी रेखा में 20.7 किमी
- गोदौलिया चौराहा, जहाँ पुराने शहर के लिए गाड़ियाँ रुकती हैं से सीधी रेखा में 1.4 किमी
ये सीधी दूरियाँ हैं; गलियों से सड़क मार्ग इससे लंबा है। · स्थान अनुमानित
स्रोत: Incredible India — Kabir Chaura Math · Wikipedia — Kabir Chaura



