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काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर का बलुआ पत्थर का द्वार
काशी यात्रा गाइड

महाशिवरात्रि 2027 कब है: 6 मार्च, काशी विश्वनाथ दर्शन, शिव बारातMaha Shivratri 2027 Varanasi: 6 March, Kashi Vishwanath, Shiv Baraat

आने वाला आयोजन: 6 मार्च 2027

Kashidwar द्वारा ·

  • तिथिशनिवार 6 मार्च 2027 (फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी)
  • निशिता कालरात 11:44–12:33, 6–7 मार्च की रात (द्रिक पंचांग, वाराणसी)
  • मंदिररात भर खुला; 2026 में लगातार 45 घंटे
  • बुकिंग2026: ऑनलाइन बुकिंग, वीआईपी और स्पर्श दर्शन बंद
  • शिव बारातशाम को, महामृत्युंजय मंदिर (दारानगर) से दशाश्वमेध की ओर
  • अनुमति नहींफ़ोन, स्मार्टवॉच, बड़े बैग, पेन, लाइटर

महाशिवरात्रि, यानी शिव की महारात्रि, काशी में शिव-पार्वती विवाह के उत्सव के रूप में मनाई जाती है। 2027 में यह शनिवार, 6 मार्च को है। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर इस रात भर दर्शन के लिए खुला रहता है, और शाम को शिव बारात पुराने शहर से होकर निकलती है। मंदिर ने 2027 की व्यवस्था अभी घोषित नहीं की है, इसलिए यहाँ पुष्ट तिथि और पूजा का समय दिया गया है, और अलग से साफ़ बताया गया है कि 2026 में मंदिर, पुलिस और बारात के आयोजकों ने क्या व्यवस्था की थी।

महाशिवरात्रि 2027 कब है: तिथि और पूजा का समय (वाराणसी)

महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है, यानी फाल्गुन के कृष्ण पक्ष की चौदहवीं रात को। द्रिक पंचांग के अनुसार वाराणसी में यह शनिवार, 6 मार्च 2027 को है। चतुर्दशी तिथि 6 मार्च को दोपहर 12:03 बजे शुरू होकर 7 मार्च को दोपहर 1:46 बजे तक रहेगी। निशिता काल पूजा, यानी आधी रात की वह पूजा जिसके लिए बहुत-से श्रद्धालु रात भर जागते हैं, 6 मार्च की रात 11:44 बजे से 12:33 बजे (7 मार्च) तक है। व्रत रखने वाले 7 मार्च को सुबह 6:16 से दोपहर 1:46 बजे के बीच पारण करेंगे।

  • प्रथम प्रहर: शाम 6:02 से रात 9:06 बजे तक (6 मार्च)
  • द्वितीय प्रहर: रात 9:06 से 12:09 बजे तक (6–7 मार्च की रात)
  • तृतीय प्रहर: रात 12:09 से 3:12 बजे तक (7 मार्च)
  • चतुर्थ प्रहर: रात 3:12 से सुबह 6:16 बजे तक (7 मार्च)
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केंद्र सरकार की 2027 की अवकाश सूची में भी, जिसे कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने 16 जुलाई 2026 को जारी किया, महाशिवरात्रि शनिवार, 6 मार्च को दर्ज है। 7 नवंबर 2026 को जाँचने तक उत्तर प्रदेश ने अपनी 2027 की अवकाश सूची जारी नहीं की थी। 2026 में यह पर्व 15 फ़रवरी को था; इस बार यह लगभग तीन हफ़्ते बाद, मार्च में पड़ रहा है। यह सावन की शिवरात्रि भी नहीं है; वह अलग पर्व है, जो 2027 में 31 जुलाई को है। द्रिक पंचांग के अनुसार वाराणसी में रात के चार प्रहरों की पूजा का समय:

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शिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ दर्शन का समय (2026 की समय-सारणी)

सामान्य दिनों में मंदिर रात 2:30 से 3 बजे के बीच खुलता है, रात 11 बजे बंद होता है और दिन में पाँच आरतियाँ होती हैं। महाशिवरात्रि पर यह दिनचर्या बदल जाती है: रात भर चार प्रहर की आरती होती है और दर्शन नहीं रुकते। मंदिर न्यास ने 2027 की समय-सारणी अभी जारी नहीं की है; 2026 में उसने 4 फ़रवरी को, यानी पर्व से ग्यारह दिन पहले, समय घोषित किया था। 15 फ़रवरी 2026 का कार्यक्रम यह था:

  • मंगला आरती: सुबह 2:15–3:15 बजे; श्रद्धालुओं के लिए कपाट 3:30 बजे खुले
  • मध्याह्न भोग आरती: 11:40 से 12:20 बजे
  • प्रथम प्रहर आरती: रात 10 से 12:30 बजे (शंखनाद 9:30 बजे)
  • द्वितीय प्रहर आरती: रात 1:30–2:30 बजे
  • तृतीय प्रहर आरती: सुबह 3:30–4:30 बजे
  • चतुर्थ प्रहर आरती: सुबह 5–6:15 बजे
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चारों प्रहर की आरती के दौरान भी दर्शन चलते रहे। मंदिर 15 फ़रवरी की मंगला आरती से 16 फ़रवरी की रात 11 बजे तक लगभग 45 घंटे लगातार खुला रहा, और न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के अनुसार 9.5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पीटीआई की ख़बर में बताए गए न्यास के नोटिस के अनुसार 2025 में शिवरात्रि पर सप्तऋषि, शृंगार-भोग और शयन आरती नहीं होनी थीं और उस रात कपाट बंद नहीं होने थे। 6–7 मार्च 2027 को भी ऐसी ही व्यवस्था की संभावना है, पर असली समय के लिए फ़रवरी 2027 में न्यास की वेबसाइट ज़रूर देखें।

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क्या शिवरात्रि पर सुगम दर्शन बुक हो सकता है? बुकिंग और साथ क्या ले जाएँ

शायद नहीं। जनवरी 2026 में न्यास ने 15 और 16 फ़रवरी, यानी शिवरात्रि और उसके अगले दिन, के लिए दर्शन-पूजन की सभी ऑनलाइन बुकिंग निलंबित कर दी थी, और इन तारीख़ों के लिए पहले से जारी टिकट रद्द माने गए। शिवरात्रि की सभी आरतियों के टिकट रद्द हुए, विशेष दर्शन बंद रहे, और वीआईपी, प्रोटोकॉल और स्पर्श दर्शन (शिवलिंग को छूकर दर्शन) पर रोक रही। 2025 में भी पर्व के आसपास तीन दिन वीआईपी दर्शन बंद रहे थे। 2027 के लिए अभी कुछ घोषित नहीं हुआ है। अगर 2026 की व्यवस्था दोहराई गई, तो 6 और 7 मार्च 2027 की बुकिंग भी बंद रहेगी, इसलिए 'विशेष', 'वीआईपी' या स्पर्श दर्शन के नाम पर किसी को पैसे न दें, और बुकिंग केवल न्यास की अपनी वेबसाइट पर करें।

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2026 में धाम के अंदर ये चीज़ें ले जाने की अनुमति नहीं थी: मोबाइल फ़ोन, स्मार्ट या डिजिटल घड़ी, बड़े बैग, पेन-पेंसिल, प्लास्टिक का सामान, पानी की बोतल, तंबाकू, पान मसाला व अन्य नशीली चीज़ें, माचिस, लाइटर और सिगरेट। इन्हें होटल में ही छोड़ दें। अंदर पीने का पानी, ग्लूकोज़, ओआरएस और चिकित्सा सहायता केंद्र के साथ खोया-पाया केंद्र भी था, और एलईडी स्क्रीन पर गर्भगृह की पूजा दिखाई जा रही थी। वाराणसी के निवासियों के लिए स्थानीय पहचान पत्र दिखाने पर अलग कतार से प्रवेश की व्यवस्था थी।

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काशी की शिव बारात: मार्ग और समय

आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं — यात्रा से पहले जाँच लें

शिवरात्रि की शाम काशी में शिव की बारात निकलती है। सबसे बड़ी शिव बारात शिव बारात समिति निकालती है, जो दारानगर के महामृत्युंजय महादेव मंदिर से डमरू, शंखनाद और झांकियों के साथ चलती है, जिनमें दूल्हा बने शिव, उनके गण, औघड़ और देव-दानव होते हैं, और सड़क के दोनों ओर, छतों और छज्जों पर भारी भीड़ जमा रहती है। आयोजकों के अनुसार इसकी शुरुआत 1983 में हुई, जब बाबा विश्वनाथ के अरघे से चोरी हुआ सोना वापस मिला था; 2026 में बारात का 44वाँ वर्ष था।

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बारात का कोई आधिकारिक समय घोषित नहीं होता। 2026 में बारात शाम को निकली: लगभग 5:30 बजे बाबा विश्वनाथ की प्रतीकात्मक प्रतिमा, दंड और छत्र टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास से महामृत्युंजय मंदिर के लिए रवाना हुए, जहाँ से बारात आगे बढ़ी। पारंपरिक मार्ग मैदागिन, बुलानाला और गोदौलिया होते हुए चितरंजन पार्क तक जाता है, जहाँ 'वधू पक्ष' ठंडई और मालाओं से बारात की अगवानी करता है; 2026 में बारात दशाश्वमेध के डेढ़सी पुल तक गई। 2025 में महाकुंभ की भीड़ के कारण समिति ने बारात शिवरात्रि के अगले दिन निकाली, जो 42 वर्षों में पहली बार हुआ। 2027 की तारीख़, समय और मार्ग अभी घोषित नहीं हुए हैं।

दूसरी बारातें भेलूपुर के पास तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर से निकलती हैं, जो 2026 में सोनारपुरा होते हुए हरिश्चंद्र घाट और केदार घाट पहुँची, और लक्सा की लालकुटी व्यायामशाला से भी बारात निकलती है। बारात देखनी हो तो सड़क किनारे या किसी छत पर पहले से जगह ले लें, किनारे रहें, चलती झांकियों से दूरी रखें, और साथ के लोगों से बिछड़ने की स्थिति के लिए मिलने की जगह पहले से तय कर लें।

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शिवरात्रि पर भीड़, कतार और नो-व्हीकल ज़ोन

शिवरात्रि काशी विश्वनाथ में साल के सबसे भीड़ वाले दिनों में से है। 2026 में शिवरात्रि की देर रात तक 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, और शाम 8 बजे तक हर सेकंड 10 से 12 लोग दर्शन कर रहे थे। बहुत-से लोग सड़क और जिग-जैग बैरिकेडिंग से होते हुए लगभग 3 किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर पहुँचे, और श्रद्धालुओं को छह द्वारों से प्रवेश दिया गया। महाकुंभ वाले वर्ष 2025 में 45 घंटे में लगभग 12 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। 2027 में शिवरात्रि शनिवार को है, इसलिए सप्ताहांत की भीड़ भी जुड़ सकती है।

  • हो सके तो पुराने शहर में या उसके पास ठहरें, और मंदिर तक आख़िरी हिस्सा पैदल तय करने की तैयारी रखें।
  • कतार में लगने से पहले कुछ खा लें, और भोर से पहले के घंटों के लिए हल्का गर्म कपड़ा साथ रखें।
  • अगर तारीख़ों में गुंजाइश हो, तो रविवार 7 मार्च पर विचार करें: 2026 में मंदिर शिवरात्रि के अगले दिन भी पूरे दिन खुला रहा, और ज़्यादातर दर्शन शिवरात्रि के दिन ही हुए।
  • बच्चों को पास रखें और मिलने की जगह तय कर लें; 2026 में धाम के अंदर खोया-पाया केंद्र बनाया गया था।
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मंदिर के आसपास की सड़कों पर वाहन बंद रहते हैं। 2025 में पुलिस ने गोदौलिया से मैदागिन चौराहे तक का इलाक़ा नो-व्हीकल ज़ोन घोषित किया, दशाश्वमेध घाट तक बैरिकेडिंग मज़बूत की और शहर में 55 जगहों पर बैरिकेडिंग की। 2026 में एसीपी ट्रैफ़िक ने बताया कि विश्वनाथ मंदिर जाने वाले सभी प्रमुख मार्ग नो-व्हीकल ज़ोन रहेंगे और जगह-जगह रूट डायवर्जन व बैरिकेडिंग होगी; पुलिस कंट्रोल रूम, मेडिकल टीमें और एंबुलेंस भी तैयार रहीं। दोनों वर्षों में यह योजना पर्व से पहले के पखवाड़े में घोषित हुई; 2027 की योजना अभी घोषित नहीं हुई है। कुछ काम की बातें:

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ध्रुपद मेला, लाइव दर्शन और रंगभरी एकादशी

आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं — यात्रा से पहले जाँच लें

शिवरात्रि से पहले के दिनों में तुलसी घाट पर ध्रुपद मेला होता है। यह शिव को समर्पित ध्रुपद संगीत का पाँच दिन का उत्सव है, जिसका समापन महाशिवरात्रि पर होता है। यह पहली बार 1975 में हुआ था। 52वाँ मेला 11 फ़रवरी 2026 को शुरू हुआ, जिसमें 50 से अधिक कलाकार आए, जिनमें अमेरिका, डेनमार्क, रूस और इंग्लैंड के कलाकार भी थे, और हर दिन 10 से 12 प्रस्तुतियाँ हुईं। 7 नवंबर 2026 तक 2027 की तारीख़ें घोषित नहीं हुई थीं; अगर इस बार भी समापन शिवरात्रि पर हुआ, तो मेला मार्च के पहले सप्ताह में होगा।

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अगर मंदिर तक न पहुँच सकें, तो न्यास अपनी वेबसाइट पर गर्भगृह के लाइव दर्शन का निःशुल्क प्रसारण करता है। काशी में विवाह का उत्सव शिवरात्रि के बाद भी चलता है: रंगभरी (आमलकी) एकादशी, गुरुवार 18 मार्च 2027 को, मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ विवाह के बाद माता पार्वती का गौना कराकर काशी लाते हैं, और इसी दिन से काशी में होली की शुरुआत मानी जाती है, जब बाबा और गलियाँ गुलाल से रंग जाती हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाशिवरात्रि 2027 में कब है?

शनिवार, 6 मार्च 2027 को। द्रिक पंचांग के अनुसार वाराणसी में निशिता काल पूजा 6 मार्च की रात 11:44 से 12:33 बजे (7 मार्च) तक है, और केंद्र सरकार की 2027 की अवकाश सूची में भी 6 मार्च दर्ज है।

महाशिवरात्रि 2027 6 मार्च को है या 7 मार्च को?

6 मार्च को। चतुर्दशी तिथि 6 मार्च दोपहर 12:03 से 7 मार्च दोपहर 1:46 बजे तक है, और निशिता काल समेत पूजा की रात 6 मार्च की रात है। व्रत का पारण 7 मार्च को सुबह 6:16 से दोपहर 1:46 बजे के बीच होगा।

क्या महाशिवरात्रि 2027 फ़रवरी में है या सावन में?

दोनों में नहीं। यह 6 मार्च 2027 को है; 2026 में यह 15 फ़रवरी को थी। सावन की शिवरात्रि अलग पर्व है, जो द्रिक पंचांग (वाराणसी) के अनुसार 2027 में 31 जुलाई को है।

क्या शिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ मंदिर रात भर खुला रहता है?

हाँ। 2026 में मंदिर रात 2:15 बजे की मंगला आरती के बाद खुला और लगभग 45 घंटे, यानी अगले दिन रात 11 बजे तक, खुला रहा; रात भर चार प्रहर की आरती हुई और दर्शन चलते रहे। 2027 की समय-सारणी अभी घोषित नहीं हुई है।

क्या शिवरात्रि पर सुगम दर्शन बुक कर सकते हैं?

2026 में नहीं: न्यास ने शिवरात्रि और अगले दिन की दर्शन-पूजन की सभी ऑनलाइन बुकिंग निलंबित कर दी थी, आरती टिकट रद्द किए थे और वीआईपी, प्रोटोकॉल व स्पर्श दर्शन बंद रखे थे। 2027 के लिए अभी कुछ घोषित नहीं हुआ है। बुकिंग केवल न्यास की वेबसाइट पर करें, और विशेष दर्शन के नाम पर किसी को पैसे न दें।

वाराणसी में शिव बारात कितने बजे निकलती है?

शिवरात्रि की शाम को। कोई आधिकारिक समय घोषित नहीं होता; 2026 में बारात लगभग 5:30 बजे के बाद दारानगर के महामृत्युंजय मंदिर से निकली और दशाश्वमेध के डेढ़सी पुल तक गई। 2027 का समय और मार्ग अभी घोषित नहीं हुए हैं।

क्या शिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ में मोबाइल ले जा सकते हैं?

नहीं। 2026 में मोबाइल फ़ोन, स्मार्ट व डिजिटल घड़ी, बड़े बैग, पेन, प्लास्टिक का सामान, पानी की बोतल, तंबाकू, माचिस और लाइटर धाम में ले जाने की अनुमति नहीं थी। इन्हें होटल में ही छोड़ दें।

क्या काशी विश्वनाथ के शिवरात्रि दर्शन लाइव देख सकते हैं?

हाँ। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास अपनी वेबसाइट shrikashivishwanath.org पर गर्भगृह के लाइव दर्शन का सभी के लिए निःशुल्क प्रसारण करता है।

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