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रवींद्रपुरी, वाराणसी में सड़क से दिखता बाबा कीनाराम स्थल का प्रवेश द्वार
हिन्दूमठ

बाबा कीनाराम स्थल — क्रीं कुंडBaba Keenaram Sthal — Kreem Kund

  • समयकोई आधिकारिक समय प्रकाशित नहीं; आश्रम से पूछ लें
  • प्रवेशकोई टिकट नहीं बताया गया
  • कितना समय लगेगा30 से 45 मिनट
  • उत्तम समयसुबह के दर्शन; अघोर चतुर्दशी पर बाबा कीनाराम का जन्मोत्सव और लोलार्क षष्ठी पर उनकी छठी (दोनों भाद्रपद में, अगस्त–सितंबर) पर भारी भीड़ होती है

शिवाला के पास रवीन्द्रपुरी का वह आश्रम, जिसे अघोर परंपरा अपना मुख्य पीठ मानती है।

एक नज़र में

समय और शुल्क आधिकारिक स्रोत से पुष्ट नहीं हैं; जाने से पहले जाँच लें।

जानने योग्य

  • यह जीवित आश्रम है, तमाशा नहीं: धूनी और समाधियों के दर्शन के लिए आएँ, शांत रहें और सेवकों के निर्देश मानें।
  • अस्सी घाट से लगभग 1 किमी उत्तर; लोलार्क कुंड के साथ देखें, जो लोलार्क षष्ठी का दूसरा केंद्र है और थोड़ी दूरी पर दक्षिण में है।
  • जन्मोत्सव और लोलार्क षष्ठी पर बाहर सड़क पर सैकड़ों दुकानों का मेला लगता है और दर्शन कतार से होते हैं।
पूरी कहानी पढ़ें

इसके पहले पीठाधीश्वर बाबा कीनाराम (स्थल के अपने अभिलेख में 1620–1771) ने यहाँ धूनी फिर से जगाई और पास के पवित्र क्रीं कुंड को आशीर्वाद दिया। उनकी समाधि यहीं है, और 1978 से ग्यारहवें पीठाधीश्वर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम गद्दी पर हैं।

स्थल के अपने शब्दों में अघोर चेतना की सहज, स्वाभाविक अवस्था है, और क्रीं कुंड वह स्थान है जहाँ कैलाशी और गिरनारी परंपराएँ मिलती हैं, जो शैव, वैष्णव और शाक्त धाराओं को जोड़ता है। धूनी की भभूत ही एकमात्र प्रसाद है। बाबा कीनाराम का 'विवेकसार' अघोर का मूल ग्रंथ माना जाता है।

स्रोत: Wikipedia — Baba Keenaram Sthal (coordinates) · Aghorpeeth.org (official) — About Kring Kund · Aghorpeeth.org (official) — Peethadheeshwars of Kring Kund · Aghorpeeth.org (official) — Aghoracharya Baba Kinaram Ji · Aghorpeeth.org — 'Lolark Chhath', sixth-day ceremony of the Aghoracharya (17 Sep 2026)

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